·
खबर बसंत
के आने की
मेरे बगीचे में डहेलिये
की
कई कलियों ने आँखे खोली
और आज वे फूल बन मुस्करा
पड़ीं
खबर देती बसंत के आने
की
गमले के पीछे लकड़ी के
तिनकों पर
दो दिन से बैठी कबूतरी
ने
आज दो नन्हें अंडे दिऐ
निकलेंगे चूजे जब
आ जाएगा बसंत तब
दरवाजे पर स्थिर खड़े
नीम के पेड़ से कल तक
झरझर झड़ती थी पत्तियाँ
आज कोमल गुलाबी कोंपलो
ने
चुटकी काटी है तने में
और आहट हुई बसंत के
आने की
शबनम सी टपकती बूँदों
को
जब बालों से झाड़ा मेंने
तो कोई आवारा सी हवा
उड़ा ले गई लट मेरी
और फेंक गई पाती बालकनी
में मेरी
लिखा था कि आ रहा है बसंत
हवा की सरसराहट में
दुबककर हौले से
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