Thursday, 6 December 2012

हर शहर का अपना मौसम होता है| गुलाबी नगरी की इस गुलाबी ठंड में गुलदाऊदी और गेंदे की महक है| गजक की मीठास है शादियों की धूमधाम है रात को कड़ाही में उबल उबलकर गुलाबी होते दूध का लाजवाब स्वाद|मौसम का मजा लेना हो तो इन सब का खूब मजा़ लेना चाहिये| घर के नीचे लान में टहलते हुए जब भी फू़लों से बात करती हूं लगता है, मौसम कोई कविता सुना रहा है| अपने भीतर का शोर यदि हम शांत कर सके तो मौसम का गीत भी हम सुन सकते हैं|

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