Friday, 16 November 2012

आज बहुत दिन बाद दोपहर में इतनी मीठी नींद आई| त्यौहारों का आना जितना उत्साहवर्धक होता है,जाना थोड़ा सा अवसादमय| रंग, रोशनी,मीठास से भरा दीवाली का त्यौहार| बची हुई मिठाईयों के टुकड़े,बिखरे हुऐ रंगोली के रंग मानों कह रही है कि हर दिन ही त्यौहार क्यों नहीं होता?

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