शरद का व्योम आज निर्मल है
पात पात में बिखरा रोली अक्षत है
मन के द्वार पर ,
अनजानी खुशी की दस्तक है ,
दीपो के उजास का
करता जग स्वागत है |
जड़ चेतन में फैला उल्लास है,
दीप की आशा सा
मन में विश्वास है ,
आस्था को सम्बल देता,
माँ लक्ष्मी के आने की आस है |
खुशियो की झालरों से सजा
घर, आँगन ,द्वार है ,
अल्पना में सजा ,
गृहिणी का प्यार है
मिल लें, खिल लें, फैला लें बाहें,
प्यार का दीप एक ह्रदय में जला लें |
नूतन उर्जा का अनुपम एहसास है,
अभिनंदन में तैयार हम,
कि दीपोत्सव पास है |
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