Saturday, 3 November 2012

दिवाली अभिनंदन


शरद का व्योम आज निर्मल है

पा‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍त पात में बिखरा रोली अक्षत है 

मन के द्वार पर ,    

अनजानी खुशी की दस्तक है ,

दीपो के उजास का

करता जग स्वागत है |

जड़ चेतन में फैला उल्लास है,

दीप की आशा सा

मन में विश्वास है ,

आस्था को सम्बल देता,

माँ लक्ष्मी के आने की आस है |

खुशियो की झालरों से सजा

घर, आँगन ,द्वार है ,

अल्पना में सजा ,

गृहिणी का प्यार है

मिल लें, खिल लें, फैला लें बाहें,

प्यार का दीप एक ह्रदय में जला लें |

नूतन उर्जा का अनुपम एहसास है,

अभिनंदन में तैयार हम,

कि दीपोत्सव पास है |        

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